Job Bible Study - Chapter 15
Thursday, July 29, 2021
Wednesday, July 28, 2021
Tuesday, July 27, 2021
Monday, July 26, 2021
Saturday, July 24, 2021
Friday, July 23, 2021
Thursday, July 22, 2021
Wednesday, July 21, 2021
Monday, July 19, 2021
Sunday, July 18, 2021
Friday, July 16, 2021
Thursday, July 15, 2021
Job Bible Study I Chapter 4 I Hindi - Tamil I When people are in DISTRESS... / जब लोग संकट में होते हैं… / ஜனங்கள் துன்பத்தில் இருக்கும்போது... I Mariyosh Joseph
Job Bible Study - Chapter 4
When people are in DISTRESS...
जब लोग संकट में होते हैं…
ஜனங்கள் துன்பத்தில் இருக்கும்போது...
Wednesday, July 14, 2021
Job Bible Study I Chapter 3 I Hindi - Tamil I Not at Ease nor QUIET? / न तो चैन, न शान्ति और न विश्राम है? / சுகமுமில்லை, நிம்மதியுமில்லை, அமைதலுமில்லையா? I Mariyosh Joseph
Job Bible Study - Chapter 3
Not at Ease nor QUIET?
न तो चैन, न शान्ति और न विश्राम है?
சுகமுமில்லை, நிம்மதியுமில்லை, அமைதலுமில்லையா?
https://youtu.be/UJ90Im-wQiU
Job Bible Study I Chapter 2 I Hindi - Tamil I Upright Amidst Misery / खरा और सीधा / உத்தமன் I Mariyosh Joseph
Job Bible Study - Chapter 2
Upright Amidst Misery / खरा और सीधा / உத்தமன்
Job Bible Study I Chapter 1 I Hindi - Tamil I Upright Amidst Misery / खरा और सीधा / உத்தமன் I Mariyosh Joseph
Job Bible Study - Chapter 1
Upright Amidst Misery / खरा और सीधा / உத்தமன்
Tuesday, May 19, 2020
गर्व के लक्षण
व्यवस्थाविवरण 8 अध्याय से
अध्ययन
👉हमें
नम्र बनाने के लिए जंगल जैसे की अनुभवों में प्रभु ने हमें जो लेखे आया उसे याद नहीं
करना (2)
👉परमेश्वर के वचन को नहीं, बल्कि दुनिया की चीजों को खोजने को प्राथमिकता देना (3)
👉परमेश्वर
की आवाज़ को नहीं मानना और उनके डर भय मानकर उनके मार्ग पर नहीं चलना (6,11,20)
👉हमें
अनुशासित करने के लिए परमेश्वर जो हमें ताड़ना देता है उससे सबक नहीं लेना और खुद को
अनुशासित नहीं करना (5)
👉विजय
और समृद्धि में खुद के शक्ति और पराक्रम को कारण ठहराना और परमेश्वर को स्मरण नहीं
रखना (17,18)
Friday, May 15, 2020
ताकि आपका भला हो…
व्यवस्थाविवरण 6 अध्याय से
अध्ययन
👉अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखें (6:5)
👉परमेश्वर के वचन को अपने मन में रखें और बनी रहें (6:6)
👉परमेश्वर के वचनों को अपने घरों और दिलों में लिखें (6:6-9)
👉उत्साहपूर्वक केवल सृष्टिकर्ता परमेश्वर का पीछा करें, जो आपके साथ उपस्थित है (6:14)
👉अपने परमेश्वर यहोवा की परीक्षा न करें (6:16)
👉प्रभु की सभी आज्ञाओं, चितौनियों, और विधियों को यत्नपूर्वक और सावधानी से पालन करें (6:17,25)
👉किसी भी चीज़ में शामिल न हों जो आपको फिर से बंधन में ले जाए, क्योंकि परमेश्वर ने हमें पाप के गुलामी से बाहर निकाला है (6:23,12)
👉जो काम यहोवा की दृष्टि में ठीक और सुहावना है वही किया करें (6:18)
👉बच्चे जो परमेश्वर के वचन के बारे में सवाल पूछते हैं, उन्हें चुप न कराएँ बल्कि उन्हें समझायें और सिखायें (6:20-25)
Thursday, May 7, 2020
जब तक ...

व्यवस्थाविवरण 2 अध्याय से अध्ययन
👉जब तक कि परमेश्वर की अनुमति न हो हम एक जगह पर लंबे समय तक नहीं रह सकते (3)
👉जब तक प्रभु हमें प्रदान
नहीं करते तब तक हमें कुछ नहीं मिल सकता (5)
👉जब तक प्रभु की उपस्थिति
हमारे साथ नहीं है, तब तक हम भारी जंगल जैसे की जीवन में चल नहीं सकते (7)
👉जब तक हम विश्वासयोग्यता
से पुरे मन से प्रभु का अनुसरण नहीं करते, हम उनका उद्देश्य पूरा नहीं कर सकते (14,31-33)
👉जब तक हम ईर्ष्या, लालच
और घृणा को नहीं छोड़ते, तब तक हम परमेश्वर द्वारा नियुक्त मंज़िल तक नहीं पहुँच सकते
(5,9,19)
👉जब तक हम परमेश्वर की
सामर्थ के साथ शत्रुता का सामना नहीं करते, तब तक हम अधिक चुनौतियों का सामना करने
के लिए तैयार नहीं हो सकते हैं और उच्च उद्देश्यों के अधिकारी नहीं हो सकते हैं (24-26,36)
Sunday, May 3, 2020
निर्णय लेना

गिनती 36 अध्याय से अध्ययन
👉 दूसरों और परमेश्वर की सुनें और अपने ही बात पर हटल न रहें
(2,5)
👉 प्रभु के वचन के अनुसार निर्णय लें (5)
👉 चुगली करने के बजाय लोगों के सामने बोलें (1)
👉 ईश्वरीय अगुवों द्वारा किए गए निर्णयों पर विश्वास करें और उनका पालन करें (10)
Friday, May 1, 2020
सीमाओं

गिनती 34 और 35 अध्याय से अध्ययन
👉 अपने आप को परमेश्वर द्वारा परिभाषित (निर्धारित) सीमाओं से बांधें (34:1,2)
👉 जहाँ भी हम रहें प्रभु के वचन का आदेश का पालन करें (35:29)
👉 पालन नहीं की गयी सीमाएँ हमारे जीवन को नष्ट कर देंगी (35:26,27)
👉 बैर, शत्रुता और किसी भी तरह की अभक्ति या अधर्म हमें सीमाओं को पार करने के लिए प्रेरित करेगी (35:20,21)
👉 अशुद्धता तब होती है जब हम परमेश्वर द्वारा निर्धारित सीमाओं को पार करते हैं; परमेश्वर जो हमारे बीच रहता है वह पवित्र है (35:34)
👉 जीवन के सभी क्षेत्रों को परमेश्वर के वचन की सीमाओं के भीतर चलायें (34:12)
👉 जीवन की पुनर्स्थापना के लिए पश्चाताप करें और परमेश्वर की मुक्ति में शरण लें (35:6,13)
👉 उन लोगों के अधिकार का आज्ञा माने जिन्हें सीमाओं का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाती है (34:16,29)

